Apr 6, 2020

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प्रथम भाग:  परिचय (Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 1:  LỜI NÓI ĐẦU)

वियतनाम के गुरु थिनले गुयेन थान द्वारा ‘द्वितीय मानसिक धर्म श्रृंखला’ का “सम्यक् दृष्टि- प्रभा समाधि” विषयक प्रथम लेख: परिचय

प्रथम भागपरिचय

अंतिम टिप्पणी में, मैंने माट हान्ह गियाक द्वारा संबोधित “तांत्रिक गुरु” की उपाधि (अथवा संबोधन) को स्वीकार नहीं किया था, इसके स्थान पर मैंने इसे एक अधिक उपयुक्त उपाधि “थान त्रि मास्टर (Thanh tri Master)” से बदल दिया है। यह नया संबोधन उस कार्यक्रम के अनुसार ही है जिसे ‘वियतनाम विज्ञान और प्रौद्योगिकी संघ (VUSTA)’ द्वारा अनुमोदित किया गया है। अब हम आधिकारिक तौर पर 16 मार्च, 2018 से ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय’ द्वारा प्रदत्त लाइसेंस के साथ ‘थान त्रि मनोविज्ञान शोध और योग अनुप्रयोग संस्थान (Thanh Tri Institute of Psychology Research and Yoga Applications)’ के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। 2016 में, हम यूनेस्को के सदस्य बने, जिसे ‘यूनेस्को क्लब ऑफ रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ तिबेतन योग’ के रूप में जाना जाता है। यही कारण है कि आपको मुझे “थान त्रि मास्टर” कहना चाहिए।

तो “थान त्रि” का क्या अर्थ है? यदि अंग्रेजी भाषा के बड़े अक्षरों में लिखा जाता है, तो यह शब्द विज्ञान संगठन जैसे हमारे ‘सोंग गुयेन तंत्र हाउस’ को बताता है। यदि छोटे अक्षरों में लिखा जाता है, तो यह बुद्ध के ज्ञान पर आधारित एक द्वंद्वात्मक आध्यात्मिक विज्ञान है। “थान त्रि” को इस योग के लक्ष्य के रूप में माना जाना चाहिए जिसका उद्देश्य शुद्ध मन और विवेक है (इसे शुद्ध मन के रूप मे0हिए।

तो “थान त्रि” का क्या अर्थ है? यदि अंग्रेजी भाषा के बड़े अक्षरों में लिखा जाता है, तो यह शब्द विज्ञान संगठन जैसे हमारे ‘सोंग गुयेन तंत्र हाउस’ को बताता है। यदि छोटे अक्षरों में लिखा जात%5 ज्ञान पर विश्वास करते हुए, मैं “थान त्रि” या “शुद्ध मन” का सही अर्थ स्पष्ट करूंगा।

शुद्ध मन का अर्थ है – वह मन जो आठ सांसारिक चिंताओं से मुक्त हो: यश-अयश, प्रशंसा-निंदा, लाभ-हानि और सुख-दुःख। जो लोग इन आठ पूर्वाग्रहों से आगे नहीं बढ़ पाए हैं, उन्हें शुद्ध मन दिखाई नहीं पड़ता है। बौद्धेतर संप्रदायों में, अलौकिक लोकों में पुनर्जन्म की इच्छा से ईश्वर या अल्लाह को खुश करने के लिए अनुयायियों को अच्छे कर्म करने और बुरे कर्मों से बचने के लिए अनुदेशित किया जाता है। इसलिए, अच्छे विचार होने के बावजूद भी उनका मन अशुद्ध ही रहता है। बौद्ध साधक भी अच्छा सोचते हैं और करते हैं लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य शुद्ध मन प्राप्त करना है, जो न तो अच्छा है और न ही बुरा। इसे बोधिचित्त का मन कहा जाता है।

तो “शुद्ध मन” सामान्य रूप से बौद्ध साधकों के द्वारा साधना की अंतिम अवस्था (निर्वाण) को प्राप्त करने का कुशल कर्म है तथा विशेष रूप से शुद्ध मन, योग है। “शुद्ध” शब्द संज्ञा और विशेषण दोनों के रूप में “संघ” को बताता है, जो तदनुसार भिक्षुओं और आम व्यक्तियों दोनों बौद्ध साधकों को संदर्भित करता है। इसलिए, एक बौद्ध साधक की गुणवत्ता की जांच उसकी प्राकृतिक शुद्धता के आधार पर की जानी चाहिए, जिसे एक द्वंद्वात्मक आध्यात्मिक मानदंड माना जा सकता है।

उन बिंदुओं के आधार पर, मुझे “थान त्रि मास्टर” या ” शुद्ध मन का गुरू (Master of Pure Mind)” कहा जाना चाहिए क्योंकि मैं आपको बौद्ध धर्म के आधार पर शुद्ध मन के मार्ग पर अग्रसर कर रहा हूं। 25 साल के शोध, सर्वेक्षण, अभ्यास, अनुप्रयोग और अच्छे परिणाम प्राप्त करने के बाद, बौद्ध संतों विशेष रूप से गुरु रिनपोछे, अवलोकितेश्वर और डाकिनी के ज्ञान पर भरोसा करते हुए, मैंने आध्यात्मिक अभ्यास के छह तरीकों का आविष्कार किया है (जिसे “सिक्स वंडरफुल धर्म गेट्स” कहा जाता है), जिनके नाम हैं :

  1. त्रिरत्नों की शरण जाने के आठ धर्म (बुद्ध पर विश्वास करने की आठ पद्धतियाँ)
  2. सम्यक् दृष्टि-प्रभा समाधि (बुद्ध की प्रज्ञा के आलोक में देखने-समझने की साधना पद्धति ताकि साधन और ज्ञान को अविभाज्य बनाया जा सके)
  3. निर्बाध दान (बिना एक दिन छोड़े निरन्तर निर्बाध रूप से दान देने की साधना पद्धति)
  4. चलते हुए, लोटस सूत्र की धारणी करना (आध्यात्मिक शक्ति संचय करने के लिए क्रमिक ढंग से मंत्र पाठ करने की साधना पद्धति)
  5. बोधिचित्त पर ध्यान करना (शुद्ध मन की साधना के लिए ध्यान [समाधि और विपश्यना दोनों का] और बोधिचित्त की साधना पद्धति)
  6. पञ्च स्तरीय/क्रियात्मक दैवीय योग (पांचवीं क्रिया पर पूरी तरह से प्रबुद्ध होने के सरल दृश्य का अभ्यास, जो अगली क्रिया यां स्तर के लिए तैयार करता है)।

शरीर, वाणी और मन के अभ्यास के संदर्भ में, उन्हें निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है:

– त्रिरत्नों की शरण जाने के आठ धर्म और निर्बाध दान शरीर के अभ्यास से संबंधित हैं

– चलते हुए, लोटस सूत्र की धारणी करना वाणी के अभ्यास से संबंधित है

– सम्यक् दृष्टि-प्रभा समाधि, बोधिचित्त पर ध्यान और पञ्च क्रियात्मक दैवीय योग ये मन (ज्ञान) के अभ्यास से संबंधित हैं।

ये मेरे सबसे अच्छे शब्द हैं, विशेष रूप से सम्यक् दृष्टि-प्रभा समाधि नामक एक आध्यात्मिक अभ्यास की साधना करना, जिसे मैं द्वितीय भाग में विस्तार से प्रस्तुत करूंगा!

लेखक – थिनले गुयेन थान (फु वान पर्वत की चोटी पर एक बरसात की दोपहर में, 10 जनवरी 2019)

अनुवादक- डॉ. विकास सिंह (भारत के बिहार के दरभंगा में स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में संस्कृत के सहायक आचार्य हैं।)


 

अंग्रेजी अनुवाद: Thanh Tri – The 2nd Mind Dharma: SAMYAGDRSTI – PRABHA SAMADHI – Part 1: INTRODUCTION

वियतनामी मूल: Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 1:  LỜI NÓI ĐẦU (10 bài)


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सम्यक् दृष्टि क्या है? ( Đệ nhị tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 2: THẾ NÀO GỌI LÀ CHÁNH KIẾN?)

तृतीय भाग: विभिन्न पक्षों में सम्यक् दृष्टि (Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 3: NHỮNG GÓC TƯ DUY VỀ CHÁNH KIẾN)

चतुर्थ भाग: सम्यक् दृष्टि से लाभ और मिथ्या दृष्टि से हानि (Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 4: LỢI ÍCH TỪ CHÁNH KIẾN, TÁC HẠI TỪ TÀ KIẾN)


THANH TRI – THE 2ND MIND DHARMA: SAMYAGDRSTI – PRABHA SAMADHI

PART 1: INTRODUCTION

PART 2: WHAT IS RIGHT VIEW?

PART 3: RIGHT VIEW IN DIFFERENT ASPECTS”

PART 4: GAIN FROM RIGHT VIEW, LOSE OF WRONG VIEW

PART 5: HOW TO BE EQUIPPED WITH THE FULL RIGHT VIEW

PART 7:  HOW TO TURN THE BRILLIANT LIGHT (PRABHA) INTO SAMADHI? 

PART 8:  THINGS TO NOTICE AS YOU PRACTICE SAMYAGDRSTI – PRABHA SAMADH

PART 9:  HOW DOES THE 2NDMIND DHARMA WORK?

PART 10:  WORDS FROM A MAN WHO WISHES TO BE THE 3RD HARDLY MET PERSON


 

Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI:

Bài 1: LỜI NÓI ĐẦU

Bài 2: THẾ NÀO GỌI LÀ CHÁNH KIẾN?

Bài 3: NHỮNG GÓC TƯ DUY VỀ CHÁNH KIẾN 

Bài 4: ÍCH LỢI TỪ CHÁNH KIẾN, TÁC HẠI TỪ TÀ KIẾN

Bài 5: LÀM SAO ĐỂ ĐƯỢC TRANG BỊ CHÁNH KIẾN TOÀN DIỆN?

Bài 6: LÀM SAO ĐỂ CHÁNH KIẾN ĐƯỢC QUANG MINH?

Bài 7: LÀM SAO ĐỂ QUANG MINH THÀNH TAM MUỘI?

Bài 8: NHỮNG LƯU Ý CẦN BIẾT KHI ĐẾN VỚI CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI

Bài 9: CƠ CẤU VẬN HÀNH CỦA TÂM PHÁP “CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI”

Bài 10: TÂM SỰ CỦA KẺ LUÔN MONG ĐƯỢC NOI GƯƠNG HẠNG NGƯỜI THỨ BA

  1. Dr. Vikas Singh says:
    Dear H.H. Guru

    This is very important article about you and your institute. Now I am waiting for that day when I will be there and listening the Dhamma from your lotus mouth directly.

    • Nguyên Thành
      Nguyên Thành says:

      Dear .Vikas Singh!
      I well appreciate your effort to publish Yoga Pure Mind. I hope your desire became soon! If your don’t refuse I will donate you Dharma name: TANTRA DHARMAPBODHISITA. I’m waiting for your translations into HINDI language.

  2. Dr. Vikas Singh says:
    It’s my pleasure, H.H. Guru. I am blessed—Punyanomdan (Pali terminology instead of Thanks).
  3. Anu Abhishek says:
    Tathagat is a good philosopher.
    He know that human is slave of circumstances
    So he discovered the middle path.
    Everyone should follow .

     

  4. Tantra Amitara says:
    Dear guru

    I bow my head before your lotus feet. I am thankful for this article.

    It is very good to see translation in hindi. Thank you to vikas singh. It may benefit all of us. It is no doubt about guru methods of teaching. He is full of compassion and wisdom. But we are lazy person not willing to follow atleast one. We are always trapped in eight wordly pleasures and creating karma more and more. Guru can show us the way how to overcome from these hence called master of pure mind(thahn tri). We all know positive action will give positive result but unfortunately not get out of worldly pleasures due to lack of knowledge and self-centered attitude. So we need guru teachings and blessings. Please give us blessings guru.

    May guru teachings illuminate all over the world. May guru and his concert live long for well being of all.

    May all sensient being free from all type of diseases. May all sensient being attain enlightenment

    Om mani padme hum

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