Apr 16, 2020

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तृतीय भाग: विभिन्न पक्षों में सम्यक् दृष्टि (Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 3: NHỮNG GÓC TƯ DUY VỀ CHÁNH KIẾN)

वियतनाम के गुरु थिनले गुयेन थान द्वारा ‘द्वितीय मानसिक धर्म श्रृंखला’ का “सम्यक् दृष्टि- प्रभा समाधि” विषयक तृतीय लेख: ‘विभिन्न पक्षों में सम्यक् दृष्टि’

तृतीय भागविभिन्न पक्षों में सम्यक् दृष्टि

 

2018 के क्रिसमस की पूर्व संध्या पर,  लॉन्ग एन प्रांत में बोंग लाई पैगोडा के दो भिक्षु पांच श्रामणेरों के साथ घूमते-घूमते एक शैल गुफा के सामने रुक गए, जो उस स्थान को पुनः प्रस्तुत करती है जहां एक बच्चा पैदा हुआ था जिसे यीशु कहा गया। भिक्षुओं ने उन श्रामणेरों को “तीन बार अभिवादन करना” सिखाया। इस दृश्य ने मेरे बौद्ध होने को शर्मिंदा कर दिया – “ब्रह्मांड का राजकुमार”, जो कभी भी एक बच्चे के सम्मुख नहीं झुका भले ही वह बच्चा ईश्वर बन गया हो। मुझे आश्चर्य है कि क्या उनके गुरु ने उन्हें बौद्ध होने की आदर्श स्थिति के बारे में सिखाया या नहीं? शील के तहत, एक बौद्ध को देव/ब्रह्म, असुर, दानव और अन्य वस्तुओं के सम्मुख नहीं झुकना चाहिए और न ही पूजा करनी चाहिए। तो उन श्रामणेरों को उस स्वर्ग के पुत्र के सामने तीन बार क्यों झुकना पड़ा?

“नाग को पुष्प भेंट”

मुक्ति की सम्यक् दृष्टि का आशय व्यापक ज्ञान से है जिसे दुःख कहा जाता है, दुःख समुदय, दुःखनिरोध और दुःखनिरोधगामिनी प्रतिपदा (चार आर्य सत्य)।

एक फेसबुक-पेज पर हाल ही में कुछ तिब्बती लामाओं की फोटो पोस्ट की गई थी, जिसमें वुंग ताऊ शहर के क्वान एम पैगोडा के तिब्बती लामा अपने अनुयायियों को चीनी मिट्टी के बर्तन में  चढावा तैयार करने के लिए निर्देशित कर रहे हैं और फिर उन्हें नदी में गिरा कर “नागों पर पुष्प चढ़ाने” के कृत्य का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह अच्छा होगा यदि वे “चढावा” करने के बजाय “भिक्षा” प्रदान करें, क्योंकि बौद्ध कभी भी पशुओं (नाग का अर्थ ड्रैगन) के लिए भेंट नहीं चढ़ाते। 13 विषयों में से ही कोई दान पाने के योग्य हैं- 4 वो हैं जो सोतापत्तिफल से अरहतफल तक पहुँच चुके हैं, 4 वो हैं जो सोतापत्तिमग्ग से अरहतमग्ग तक पहुँच चुके हैं, 4 ऐसे बौद्धेतर हैं जो पहले से चौथे ध्यान तक पहुँच चुके हैं और 1 वह है जो एक गुणी बौद्ध साधक है। यहाँ से हम गर्व महसूस कर सकते  हैं कि एक बौद्ध साधक, जो केवल पंचशीलों का पालन करता है, पहले तीन समूहों (अर्थात् दान प्राप्त करने के योग्य) के बराबर खड़ा हो सकता है, जबकि बौद्धेतर साधकों को ध्यान लगाने के लिए बड़ी कठिनाई से गुजरना पड़ता है।

बोंग लाई पैगोडा के दो भिक्षु बौद्धेतर संप्रदाय के प्रति अपने विनम्र और सौहार्दपूर्ण रवैये को दिखाते हैं लेकिन वास्तव में वे बुद्ध की शिक्षाओं के खिलाफ हैं। अन्य दो तिब्बती लामा समंतभद्र बोधिसत्त्व के तृतीय पुण्य व्रत के रूप में “व्यापक सांस्कृतिक दृष्टिकोण और प्रचुर मात्रा में चढ़ावा” को दिखा सकते हैं, लेकिन वास्तव में वे बौद्धों की आदर्श स्थिति को सामान्य या सांसारिक स्थिति में बदल देते हैं। उपर्युक्त दो कहानियाँ सम्यक् दृष्टि के अभाव पर हमारा ध्यान केन्द्रित करती हैं जो किसी को भी भटका सकती हैं जिसके परिणामस्वरूप बौद्ध धर्म का विघटन हो सकता है क्योंकि ऐसे व%Aत्त्व के तृतीय पुण्य व्रत के रूप में “व्यापक सांस्कृतिक दृष्टिकोण और प्रचुर मात्रा में चढ़ावा” को दिखा सकते हैं, लेकिन वास्तव में वे बौद्धों की आदर्श स्थिति को सामान्य या सांसारिक स्थिति %Aविशेष रूप से धर्मपथ को भूलने से बचने के लिए सम्यक् दृष्टि के पक्षों को समझने की आवश्यकता है। सम्यक् दृष्टि गंभीर अर्थ से समन्वित एक सामान्य शब्द है, लेकिन इसमें चार पहलू शामिल हैं:

1 / पूजा की सम्यक् दृष्टि: जैसा कि ऊपर कहा गया है, त्रिरत्नों की शरण लेने वाले बौद्ध को देव/ब्रह्म, असुर, दानव और वस्तु विशेष की पूजा नहीं करनी चाहिए। यह इस तथ्य से आता है कि कई पैगोडा चार देवों के राजाओं, चुआ जू, लेउ हान, चुआ तिएन, धन-देवता, पृथ्वी-देवता या गुआन यू की पूजा कर रहे हैं। ये स्थान बुद्ध की शिक्षाओं और शरणगमन के खिलाफ जा रहे हैं। वे निश्चित रूप से बौद्ध पैगोडा नहीं हैं। अनेक बौद्ध ग्रन्थ कहते हैं कि प्रत्येक धर्म-सभा में बुद्ध के द्वारा उपदेश की गई देशनाओं को बौद्ध ग्रथों या बुद्ध की शिक्षाओं के अनुसार पढ़ने और कार्य करने वाले लोगों की रक्षा करने का संकल्प देवों के राजाओं और देवों के स्वामी ने लिया। क्षितिगर्भसूत्र (पृथ्वी के गर्भ की पूर्व प्रतिज्ञा वाले बोधिसत्व का सूत्र) में एक विषरहित भूतों के राजा की प्रतिज्ञा का उल्लेख है जिसमें उसने भूतों और आत्माओं को संकल्पित किया कि बुद्ध का अनुसरण करने वालों, सूत्रों को पढ़ने वालों, पवित्र स्थलों के निर्माण के लिए दान देने वालों की रक्षा करें। क्या इन बिंदुओं के आधार पर बौद्ध साधकों को उन लोगों की पूजा करनी चाहिए जो उनकी रक्षा करते हैं?

2 / सम्मान की सम्यक् दृष्टि: यह बहुत ही हास्यास्पद है कि पैगोडा जाने वाले कई लोग, देवता और असुरों के लिए धूपबत्ती जलाते हैं और उनके आगे उसी तरह झुकते हैं जैसे कोई राजकुमार अपने किसी शाही सेवक के सामने झुकता है। इसलिए हमें पता होना चाहिए कि सम्यक् दृष्टि वाला व्यक्ति केवल उन लोगों की ही पूजा करता है जो पुण्यों के स्वामी और बौद्ध संतों की तरह पूजनीय हैं।

3 / देखने की सम्यक् दृष्टि: इसका आशय है कि सभी दलीलें या तर्क बुद्ध की शिक्षाओं पर ही आधारित होने चाहिए जैसे कि “चार स्मृतिप्रस्थान” (काय स्मृतिप्रस्थान, वेदना स्मृतिप्रस्थान, चित्त स्मृतिप्रस्थान और धर्म स्मृतिप्रस्थान) और “चार प्रतिशरण” (धर्म प्रतिशरण न कि गुरु, अर्थ प्रतिशरण न कि शब्द, ज्ञान प्रतिशरण न कि चेतना, और नीतार्थ प्रतिशरण न कि नेयार्थ)। हमारी व्यक्तिनिष्ठ सोच से युक्त हमारे दृष्टिकोण को प्रस्तुत न करके हमें बौद्ध संतों की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिए – कार्य-कारण या बौद्धन्याय (हेतुविद्या) के अध्ययन में पंचविध तर्क पद्धति के पांच तरीकों में से एक (प्रत्यक्ष, तर्क के उदाहरण, अनुमान, योगज और आगम)। दृष्टिकोण में सम्यक् दृष्टि के बिना, कोई भी टिप्पणीकार बहस में खड़ा नहीं रह सकता है।

 

मुक्ति की सम्यक् दृष्टि का आशय व्यापक ज्ञान से है जिसे दुःख कहा जाता है, दुःख समुदय, दुःखनिरोध और दुःखनिरोधगामिनी प्रतिपदा (चार आर्य सत्य)।

4 / मुक्ति की सम्यक् दृष्टि: इसका आशय व्यापक ज्ञान से है जिसे दुःख कहा जाता है, दुःख समुदय, दुःखनिरोध और दुःखनिरोधगामिनी प्रतिपदा (चार आर्य सत्य)। यही कारण है कि बौद्ध साधकों का परम और अंतिम लक्ष्य मुक्ति है, न कि ब्रह्म और मानव क्षेत्र में आशीर्वाद। सम्यक् दृष्टि वाले साधक की पूरी इच्छाशक्ति और प्रतिज्ञा होती है कि अविद्या ग्रसित संसार से मुक्ति की – यही महायान की भावना है। केवल जिनके पास पूर्ण सम्यक् दृष्टि है, वे ही इस गुण के अधिकारी हो सकते हैं। संक्षेप में, एक व्यक्ति जिसके पास सम्यक् दृष्टि के बारे में अधिक ज्ञान और गहराई से टीकाओं का ज्ञान है, लेकिन इन चार पहलुओं का अनुसरण नहीं करता है अथवा इनके खिलाफ कार्य करता है तो इसका कोई मूल्य नहीं है। एक व्यापक सम्यक् दृष्टि के साथ एक बौद्ध साधक क्रमिक स्तर से ज्ञान प्राप्त करता है। इस बीच, जो लोग बिना या सम्यक् दृष्टि के अभाव वाले हैं, वे रेत पर अपना घर बनाने की तरह हैं। यह बताता है कि वे वर्षों से धर्म का अभ्यास क्यों करते हैं लेकिन धर्म के बारे में नहीं समझते हैं। उदाहरण के लिए, उनका मानना ​​है कि बुद्ध पूरी तरह से प्रबुद्ध हैं, फिर भी वे दानव, असुर, परी या देव से मदद मांगते हैं। वे “सप्त आर्य कोष” के मूल्य के बारे में जानते हैं, लेकिन फिर भी धन के देवता की पूजा करते हैं, यह कहते हुए कि “एक भूखा व्यक्ति किसी भी चीज पर ध्यान नहीं लगा सकता।” इसे “एक ही समय में आशीर्वाद और ज्ञान की साधना” के स्थान पर “आशीर्वाद और मूर्खता/दुर्भाग्य की साधना” कहा जाता है।

 

“एक ही समय में आशीर्वाद और मूर्खता/दुर्भाग्य की साधना करना”

बुद्ध की प्रज्ञा प्रत्येक दिशा को प्रकाशित करे।

ओं मणि पद्मे हूं

लेखक – थिनले गुयेन थान (फु वान पर्वत की चोटी पर एक बरसात की दोपहर में, 1 अक्टूबर 2019)

अनुवादक- डॉ. विकास सिंह (भारत के बिहार के दरभंगा में स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में संस्कृत के सहायक आचार्य हैं।)


अंग्रेजी अनुवाद: PART 3: RIGHT VIEW IN DIFFERENT ASPECTS”

वियतनामी मूल: Bài 3: NHỮNG GÓC TƯ DUY VỀ CHÁNH KIẾN


संबंधित लेख:

प्रथम भाग:  परिचय (Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 1:  LỜI NÓI ĐẦU)

सम्यक् दृष्टि क्या है? ( Đệ nhị tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 2: THẾ NÀO GỌI LÀ CHÁNH KIẾN?)

तृतीय भाग: विभिन्न पक्षों में सम्यक् दृष्टि (Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 3: NHỮNG GÓC TƯ DUY VỀ CHÁNH KIẾN)

चतुर्थ भाग: सम्यक् दृष्टि से लाभ और मिथ्या दृष्टि से हानि (Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí: CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI Bài 4: LỢI ÍCH TỪ CHÁNH KIẾN, TÁC HẠI TỪ TÀ KIẾN)

 

 


THANH TRI – THE 2ND MIND DHARMA: SAMYAGDRSTI – PRABHA SAMADHI

PART 1: INTRODUCTION

PART 2: WHAT IS RIGHT VIEW?

PART 3: RIGHT VIEW IN DIFFERENT ASPECTS”

PART 4: GAIN FROM RIGHT VIEW, LOSE OF WRONG VIEW

PART 5: HOW TO BE EQUIPPED WITH THE FULL RIGHT VIEW

PART 7:  HOW TO TURN THE BRILLIANT LIGHT (PRABHA) INTO SAMADHI? 

PART 8:  THINGS TO NOTICE AS YOU PRACTICE SAMYAGDRSTI – PRABHA SAMADH

PART 9:  HOW DOES THE 2NDMIND DHARMA WORK?

PART 10:  WORDS FROM A MAN WHO WISHES TO BE THE 3RD HARDLY MET PERSON


 

Đệ nhị Tâm pháp Thanh Trí CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI:

Bài 1: LỜI NÓI ĐẦU

Bài 2: THẾ NÀO GỌI LÀ CHÁNH KIẾN?

Bài 3: NHỮNG GÓC TƯ DUY VỀ CHÁNH KIẾN 

Bài 4: ÍCH LỢI TỪ CHÁNH KIẾN, TÁC HẠI TỪ TÀ KIẾN

Bài 5: LÀM SAO ĐỂ ĐƯỢC TRANG BỊ CHÁNH KIẾN TOÀN DIỆN?

Bài 6: LÀM SAO ĐỂ CHÁNH KIẾN ĐƯỢC QUANG MINH?

Bài 7: LÀM SAO ĐỂ QUANG MINH THÀNH TAM MUỘI?

Bài 8: NHỮNG LƯU Ý CẦN BIẾT KHI ĐẾN VỚI CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI

Bài 9: CƠ CẤU VẬN HÀNH CỦA TÂM PHÁP “CHÁNH KIẾN QUANG MINH TAM MUỘI”

Bài 10: TÂM SỰ CỦA KẺ LUÔN MONG ĐƯỢC NOI GƯƠNG HẠNG NGƯỜI THỨ BA

  1. Dr. Vikas Singh (Tantra Dharma Bodhichitta) says:

    Dear H.H. Guru,

    Through this article, now my mind is clear about the various aspects of Right View. The real interpretation of Dhamma is very important in this scientific age. Guru, your words are so generous for us to understand the Dhamma’s in real way. Continuously, I understand the Buddhist literature now in depth too due to your explanations. While translating your words in exact sense of Buddhist literary terms, when I was seeing the text of Acharya Nagarjuna entitled Dharmasangraha (Excellent Collections of Docrtine), first time I heard about Four Foundations of Mindfulness” (चार स्मृतिप्रस्थान) and “The Four Reliances” (चार प्रतिशरण) first time. I am ensuring myself that I will find the details of these in your further articles.

    Regards

    Tantra Dharma Bodhichitta

     

    • Nguyên Thành
      Nguyên Thành says:

      Thank you for your translation. You are a humble scholar, I think that you understand every thing but you do best for help all sentiens beings through your efforts. I appreciat your Bodhicitta.

  2. Dr. Vikas Singh says:

    Thanks GURU, for your kind words.

    Regards

    Tantra Dharma Bodhichitta

    • Nguyên Thành
      Nguyên Thành says:

      Dear Dr. Vikas Singh!
      I think your Dharma name is Tantra Dharmabodhishita, not name which you have written!

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